पति के नौकरानी से संबंध, सामने आय CCTV फुटेज, 10 साल के बेटे के सामने…वीडियो ने लोगो के उड़ाए होश।

जयपुर के मुहाना इलाके से एक ऐसा दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है जिसे देखकर कोई भी संवेदनशील व्यक्ति दंग रह जाएगा। लोक निर्माण विभाग (PWD) में तैनात अधिशासी अभियंता गौतम मीणा पर पत्नी अनु मीणा की पिटाई और उसकी मौत को आत्महत्या बता कर छुपाने का आरोप लगाया गया है, जबकि पीहर पक्ष को मिले मोबाइल फुटेज और सीसीटीवी क्लिप्स इस घटना की सच्चाई उजागर कर रहे हैं। 7 अप्रैल 2026 को अनु ने अपने कमरे में फंदा लगाकर आत्महत्या की अंजाम दिया था, लेकिन 20 मई को मिली नई डिजिटल सामग्री ने पूरी कहानी बदल दी है और पूरे मामले ने सोशल मीडिया व प्रशासनिक महकमे में भूचाल ला दिया है।

वायरल वीडियो में स्पष्ट दिखता है कि आरोपी गौतम मीणा शराब के नशे में घर में घुसता है, चिल्लाकर गुस्से में दीवार पर टंगी एलईडी टीवी पर मुक्का मारकर उसे तोड़ देता है और कमरे में अनु व बच्चों पर बदसलूकी करता है। वीडियो के दौरान गौतम अनु को जमीन पर फेंककर जूतों व लातों से बेरहमी से पीटता है और अपने 10 वर्षीय बेटे के सामने उसे तिरस्कार भरे शाब्दिक तथा शारीरिक हमले सहन करते देखा जा सकता है। सबसे हैरान करने वाली जानकारी यह है कि 7 अप्रैल से ठीक पहले अनु ने अपने पति को वीडियो कॉल कर घटना का रोता-बिलखता मंजर दिखाया था, पर कॉल के दौरान गौतम निस्संवेदनापूर्वक उसे देखता रहा और उसके बाद अनु ने फंदा लगा लिया।

मृतका के भाई नीरज मीणा ने जयपुर के मुहाना थाने में केवल आत्महत्या का मामला नहीं दर्ज कराया है, बल्कि साज़िश के तहत की गई हत्या का आरोप भी लगाया है। नीरज ने बताया कि 2015 में अनु की शादी के समय ससुराल से अत्यधिक दहेज़ की मांग शुरू हो गई थी और विवाद शांत करने के लिए पीहर पक्ष ने पहले ही आरोपियों को ₹20 लाख नकद दिए थे। नीरज ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि मार्च 2026 में गौतम ने घर का गैस सिलेंडर खोलकर छोड़ दिया था ताकि गैस भरने से अनु और बच्चों की जान जा सके, पर अनु ने समय रहते खिड़कियाँ खोलकर जान बचाई।

वीडियो और अन्य डिजिटल सबूत वर्ष की सबसे पुख्ता सामग्री माने जा रहे हैं और मुहाना थाना पुलिस ने मृतका के भाई की रिपोर्ट पर अधिशासी अभियंता गौतम मीणा के खिलाफ भारतीय दण्ड संहिताके सुसंगत धाराओं में दहेज़ हत्या और आत्महत्या के लिए उकसाने का मुक़दमा दर्ज कर लिया है। पुलिस ने प्रारंभिक तौर पर कहा है कि सौंपी गई फुटेज वास्तविक प्रतीत होती है और इसे डिजिटल सबूत के रूप में माना जा सकता है, वहीं आरोपी को जैसे ही पता चला कि फुटेज लीक हो चुका है वह अपने सरकारी पद और रसूख का उपयोग कर जयपुर से फरार हो गया। पुलिस की तीन विशेष टीमें दिल्ली, दौसा और अन्य संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं और शीघ्र गिरफ्तारी की उम्मीद जताई जा रही है।

इस मामले का सबसे दर्दनाक पहलू मृतका के दो छोटे बच्चे हैं, जिनकी नियत अब नानी और मामा के पास सौंपी गई है और वे गहरे आघात से गुज़र रहे हैं। पड़ोसी, समाज और वक़ीलों का कहना है कि मामले की पूरी जांच के साथ-साथ पीड़ित परिजन को तत्काल सुरक्षा और मनोवैज्ञानिक सहायता मुहैया कराई जानी चाहिए। राज्य प्रशासन और पुलिस से उम्मीद की जा रही है कि वे कानून के मुताबिक त्वरित कार्रवाई कर मामलों की निष्पक्षता सुनिश्चित करेंगे और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषी को कड़ी सज़ा दिलाई जाएगी।

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