पश्चिम बंगाल की राजनीति एक नए विवाद के बीच आकर गरमाई है जहाँ हावड़ा से तृणमूल कांग्रेस के नेता शमीम अहमद का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से फैल रहा है, जिसमें उन्हें सड़क पर कम कपड़ों में पुलिस के सामने खड़ा कर परेड कराया जा रहा है। वीडियो के सामने आने के साथ ही कई लोग पुलिस की इस कार्रवाई की तुलना उत्तर प्रदेश की पुलिस की शैली से कर रहे हैं और मामला राजनीतिक रूप ले चुका है।
पुलिस के मुताबिक मामला हावड़ा के शिवपुर इलाके में चुनाव के दौरान हुई हिंसा और बमबाजी की जांच से जुड़ा है। शमीम अहमद पर लंबित मामलों के चलते वह कुछ समय से फरार था। सूचना पर शिवपुर थाने की टीम वॉर्ड 36 में स्थित उसके आवास पर पहुंची और उसे वहां से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद मिली तलाशी में सामान्य दिखने वाले घर के भीतर एक गुप्त तहखाना बरामद हुआ, जो पुलिस अधिकारियों को भी आश्चर्यचकित कर गया। तहखाने में कई कमरे बनाए गए थे और उन्हें आलीशान तरीके से सजाया गया था; महंगे फर्नीचर, टीवी, डिजाइनर इंटरियर, सीसीटीवी सिस्टम, बेडरूम, किचन व बाथरूम जैसी सुविधाएँ मिलीं। जांच में यह भी पता चला कि तहखाने तक पहुंचने के लिए घर में छिपे हुए दरवाज़े और गुप्त सीढ़ियाँ बनाई गई थीं।
He is TMC leader Raju Naskar’s right-hand man. He reached Beleghata to collect mahina wasooli but the public gave him a different welcome.
— Tajinder Bagga (@TajinderBagga) May 25, 2026
Seems he forgot Bengal is changing. pic.twitter.com/2yLavKr9Rb
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो पर जनता ने तीखी प्रतिक्रियाएँ दी हैं। कई यूज़र्स ने वीडियो को यूपी पुलिस की कार्रवाई से जोड़कर तुलना की और कुछ ने इसे सख्त कार्रवाई की मिसाल बताया। पुलिस इस वायरल वीडियो और गिरफ्तारी से जुड़े तथ्य की भी जांच कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वीडियो किस हालात में रिकॉर्ड किया गया था और क्या उससे जुड़े कोई नियम‑विपरीत कार्रवाई हुई है।
पुलिस ने फिलहाल घर से बरामद की गई महंगी सामग्रियों और तहखाने के निर्माण के स्रोत की पड़ताल शुरू कर दी है। इसमें यह पता लगाने की कोशिश चल रही है कि इन सुविधाओं का व्यय कैसे और किसके सहयोग से किया गया। साथ ही पुलिस चुनावी हिंसा और बमबाजी के मामलों की फोरेंसिक और डिजिटल जांच भी कर रही है और आवश्यक साक्ष्य जैसे मोबाइल चैट, सीसीटीवी फुटेज व बयान जुटाए जा रहे हैं।
राजनीतिक बयानबाजी तेज़ हो गई है; विपक्षी पक्ष और नागरिक संगठनों ने गिरफ्तारी और वीडियो पर आपत्ति जताई है तथा मानवाधिकार व पुलिस की कार्रवाइयों की स्वतंत्र जांच की माँग भी उठी है। राज्य प्रशासन ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए संज्ञान लेते हुए कहा है कि जांच निष्पक्ष और क़ानून के मुताबिक चलेगी और आरोप साबित होने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।











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